यदि आप उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र बनवाने जा रहे हैं, तो आवेदन करने से पहले एक महत्वपूर्ण नियम जरूर समझ लें। उत्तर प्रदेश में ST प्रमाण पत्र की व्यवस्था अन्य जाति प्रमाण पत्रों से अलग है। यहां अधिकांश जनजातियों को पूरे राज्य में नहीं, बल्कि केवल कुछ निर्धारित जिलों के लिए ही अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया है। इसलिए केवल जनजाति का नाम ST सूची में होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि वह आपके जिले के लिए अधिसूचित हो। यदि आप ऐसे जिले से आवेदन करते हैं जहां आपकी जनजाति अधिसूचित नहीं है, तो आवेदन अस्वीकार किया जा सकता है।
इस लेख में आप जानेंगे कि उत्तर प्रदेश के किन-किन जिलों में कौन-सी जनजातियां अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता प्राप्त हैं, ST प्रमाण पत्र के लिए कौन पात्र है, किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी, ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन कैसे किया जाता है तथा आवेदन करते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि प्रमाण पत्र जारी होने में किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी या देरी न हो।
आवेदन करने से पहले यह सबसे महत्वपूर्ण नियम समझ लें
उत्तर प्रदेश में कुल 15 जनजातियां और जनजातीय समूह अनुसूचित जनजाति (ST) के रूप में अधिसूचित हैं। इनमें से केवल भोटिया, बुक्सा, जौनसारी, राजी और थारू ऐसी जनजातियां हैं, जिन्हें पूरे उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है। इसके अलावा अन्य सभी जनजातियों को केवल निर्धारित जिलों के लिए ही ST का दर्जा दिया गया है।
यही कारण है कि ST प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते समय केवल अपनी जनजाति का नाम देखना पर्याप्त नहीं होता। यह भी जांचना जरूरी है कि आपकी जनजाति आपके स्थायी गृह जिले के लिए अधिसूचित है या नहीं। यदि आपकी जनजाति किसी दूसरे जिले में ST के रूप में मान्यता प्राप्त है, लेकिन आपके जिले में नहीं, तो आप उत्तर प्रदेश में उस आधार पर ST प्रमाण पत्र या राज्य सरकार के ST आरक्षण का लाभ प्राप्त नहीं कर सकेंगे।
उत्तर प्रदेश में अधिसूचित अनुसूचित जनजातियों (ST) की सूची
उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों की सूची संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 तथा समय-समय पर किए गए संशोधनों के आधार पर निर्धारित की गई है। आवेदन करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपकी जनजाति इस आधिकारिक सूची में शामिल है और यदि वह जिला-विशिष्ट जनजाति है, तो आपके जिले के लिए भी अधिसूचित हो।
पूरे उत्तर प्रदेश में मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजातियां
- भोटिया
- बुक्सा
- जौनसारी
- राजी
- थारू
इन पांच जनजातियों को पूरे उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है। यदि आपका परिवार इनमें से किसी भी समुदाय से संबंध रखता है, तो आप राज्य के किसी भी जिले से ST प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते अन्य सभी पात्रता शर्तें पूरी हों।
केवल निर्धारित जिलों के लिए मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजातियां
- गोंड समूह: गोंड, धुरिया, नायक, ओझा, पठारी और राज गोंड – केवल महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों में अधिसूचित हैं।
- खरवार समूह: खरवार और खैरवार – केवल देवरिया, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी और सोनभद्र जिलों में अधिसूचित हैं।
- सहरिया: केवल ललितपुर जिले में अधिसूचित है।
- परहिया: केवल सोनभद्र जिले में अधिसूचित है।
- बैगा: केवल सोनभद्र जिले में अधिसूचित है।
- पंखा समूह: पंखा और पनिका – केवल सोनभद्र और मिर्जापुर जिलों में अधिसूचित हैं।
- अगरिया: केवल सोनभद्र जिले में अधिसूचित है।
- पटारी: केवल सोनभद्र जिले में अधिसूचित है।
- चेरो: केवल सोनभद्र और वाराणसी जिलों में अधिसूचित है।
- भुइया समूह: भुइया और भुइंया – केवल सोनभद्र जिले में अधिसूचित हैं।
यदि आपकी जनजाति ऊपर दी गई सूची में है, लेकिन आपका परिवार ऐसे जिले में रहता है जहां उस जनजाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त नहीं है, तो आप उत्तर प्रदेश में ST प्रमाण पत्र के लिए पात्र नहीं होंगे। केवल किसी अन्य राज्य में उसी जनजाति को ST का दर्जा मिलने से उत्तर प्रदेश में स्वतः पात्रता नहीं मिलती। ऐसी स्थिति में आपको अपने मूल राज्य के लागू नियमों के अनुसार पात्रता की जांच करनी होगी।
उत्तर प्रदेश ST प्रमाण पत्र के लिए जरूरी दस्तावेज
आवेदन करने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार कर लें। यदि दस्तावेज पूरे और सही होंगे, तो सत्यापन प्रक्रिया तेज होगी और आवेदन में अनावश्यक देरी या आपत्ति आने की संभावना भी कम रहेगी।
- आधार कार्ड: पहचान और पते के प्रमाण के रूप में। यदि संभव हो, तो उसमें उत्तर प्रदेश का वर्तमान पता दर्ज होना चाहिए।
- जनजाति संबंधी प्रमाण: यह आवेदन का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। इसके लिए पिता, माता या दादा-दादी का ST प्रमाण पत्र, स्कूल का अभिलेख जिसमें जनजाति का उल्लेख हो, या ग्राम प्रधान अथवा सक्षम स्थानीय प्राधिकारी द्वारा जारी ऐसा प्रमाण प्रस्तुत किया जा सकता है, जिससे आपकी जनजातीय पहचान और मूल जिला स्पष्ट हो।
- परिवार रजिस्टर की नकल: ग्राम पंचायत द्वारा जारी परिवार रजिस्टर की प्रति, जिसमें परिवार के सदस्यों का विवरण दर्ज हो।
- राशन कार्ड: परिवार और निवास के प्रमाण के रूप में।
- उत्तर प्रदेश निवास प्रमाण पत्र: यह साबित करने के लिए कि आप संबंधित जिले के निवासी हैं।
- जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र (टीसी), जिससे जन्मतिथि का सत्यापन किया जा सके।
- पासपोर्ट आकार का रंगीन फोटो: हाल ही में खिंचवाया गया फोटो।
- स्व-घोषणा पत्र / शपथ पत्र: इसमें अपनी जनजाति, परिवार और समुदाय से संबंधित आवश्यक घोषणा दर्ज करें। कई तहसीलों में यह दस्तावेज अनिवार्य रूप से मांगा जाता है।
ध्यान दें: यदि आपकी जनजाति उत्तर प्रदेश में केवल कुछ निर्धारित जिलों के लिए अधिसूचित है, तो ऐसे दस्तावेज संलग्न करना लाभदायक रहता है जिनसे यह स्पष्ट हो कि आपका परिवार लंबे समय से उसी अधिसूचित जिले का निवासी है। ऐसे मामलों में लेखपाल द्वारा किया जाने वाला स्थानीय सत्यापन अंतिम निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
गोंड समुदाय के आवेदकों के लिए विशेष जानकारी
उत्तर प्रदेश में गोंड समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा पूरे राज्य में नहीं मिला है। यह मान्यता केवल महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, मिर्जापुर और सोनभद्र जैसे अधिसूचित जिलों तक सीमित है।
यदि गोंड समुदाय का कोई व्यक्ति वर्तमान में लखनऊ, कानपुर, आगरा या किसी ऐसे जिले में रहता है जहां गोंड समुदाय ST के रूप में अधिसूचित नहीं है, तो केवल गोंड जाति होने के आधार पर उत्तर प्रदेश का ST प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा। इसलिए आवेदन करने से पहले यह अवश्य जांच लें कि आपकी जनजाति आपके मूल या पात्र जिले के लिए अधिसूचित है।
उत्तर प्रदेश में ST प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कैसे करें?
उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र के लिए आप e-Sathi पोर्टल, UP e-District पोर्टल, जन सेवा केंद्र (CSC) या अपने क्षेत्र के तहसील कार्यालय के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन शुरू करने से पहले यह अवश्य जांच लें कि आपकी जनजाति आपके जिले के लिए अधिसूचित है और सभी जरूरी दस्तावेज तैयार हैं।
तरीका 1: e-Sathi पोर्टल से घर बैठे ऑनलाइन आवेदन करें
यदि आपके पास मोबाइल या कंप्यूटर है, तो e-Sathi पोर्टल के माध्यम से बिना किसी कार्यालय गए आवेदन किया जा सकता है।
- esathi.up.gov.in खोलें। यदि पहले से खाता नहीं है, तो New User Registration पर क्लिक करके नया पंजीकरण करें।
- मोबाइल नंबर की सहायता से अपना खाता बनाएं और यूजरनेम तथा पासवर्ड तैयार करें।
- लॉगिन करने के बाद राजस्व विभाग (Revenue Department) की सेवाओं की सूची खोलें।
- जाति प्रमाण पत्र (अनुसूचित जनजाति) सेवा का चयन करें।
- अब अपना नाम, पिता का नाम, पता, जन्मतिथि और अन्य व्यक्तिगत जानकारी ठीक उसी प्रकार भरें, जैसी आपके सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है।
- अपनी जनजाति का नाम सावधानी से दर्ज करें। नाम उत्तर प्रदेश की आधिकारिक ST सूची में दर्ज नाम से पूरी तरह मेल खाना चाहिए।
- इसके बाद अपना जिला चुनें। यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में कई जनजातियों को केवल कुछ निर्धारित जिलों में ही ST का दर्जा प्राप्त है।
- आधार कार्ड, उत्तर प्रदेश निवास प्रमाण पत्र, जनजाति संबंधी प्रमाण, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर की नकल तथा पासपोर्ट आकार का फोटो सहित सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।
- एक बार पूरी जानकारी दोबारा जांच लें। विशेष रूप से जनजाति का नाम और जिला सही होना चाहिए।
- निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें और आवेदन जमा कर दें।
- आवेदन जमा होते ही आपको एक आवेदन संख्या (Application Number) मिलेगी। इसे सुरक्षित रख लें।
- इसके बाद आवेदन स्थानीय जांच के लिए संबंधित लेखपाल के पास भेजा जाएगा।
- लेखपाल की रिपोर्ट मिलने के बाद तहसीलदार आवेदन की समीक्षा करेंगे और अंतिम निर्णय देंगे।
- आवेदन स्वीकृत होने पर अपने e-Sathi खाते में लॉगिन करके डिजिटल हस्ताक्षरित ST प्रमाण पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।
ध्यान दें: यदि आपकी जनजाति केवल कुछ निर्धारित जिलों के लिए अधिसूचित है, तो आवेदन के साथ ऐसे दस्तावेज जरूर संलग्न करें जिनसे यह स्पष्ट हो कि आपका परिवार उसी पात्र जिले से संबंधित है। इससे सत्यापन आसान होता है और आवेदन अस्वीकार होने की संभावना कम रहती है।
तरीका 2: UP e-District पोर्टल से आवेदन करें
UP e-District पोर्टल के माध्यम से भी ST प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया जा सकता है। यहां भी आवेदन की जांच और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया राजस्व विभाग द्वारा ही पूरी की जाती है।
- edistrict.up.gov.in पर जाएं।
- अपने खाते में लॉगिन करें या नया नागरिक खाता बनाएं।
- अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र सेवा चुनें।
- आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी भरें।
- आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, जनजाति संबंधी प्रमाण और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
- आवेदन जमा करने के बाद प्राप्त पावती संख्या (Acknowledgement Number) सुरक्षित रख लें।
- इसके बाद आवेदन स्थानीय सत्यापन के लिए लेखपाल के पास जाएगा।
- तहसीलदार की स्वीकृति मिलने के बाद पोर्टल से ST प्रमाण पत्र डाउनलोड किया जा सकता है।
तरीका 3: जन सेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से आवेदन करें
यदि आपको ऑनलाइन आवेदन करने में कठिनाई होती है, तो अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वहां का संचालक आपकी ओर से पूरी प्रक्रिया पूरी कर देगा।
- अपने सभी मूल दस्तावेज और उनकी फोटोकॉपी लेकर नजदीकी जन सेवा केंद्र जाएं।
- संचालक को आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, जनजाति संबंधी प्रमाण, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर की नकल और पासपोर्ट आकार का फोटो दें।
- संचालक आपकी ओर से ऑनलाइन आवेदन भरकर सभी दस्तावेज अपलोड करेगा।
- सरकारी शुल्क और CSC का सेवा शुल्क जमा करें।
- आवेदन संख्या वाली रसीद अपने पास सुरक्षित रखें।
- इसके बाद आवेदन लेखपाल के पास स्थानीय सत्यापन के लिए भेजा जाएगा।
- तहसीलदार की मंजूरी मिलने के बाद प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।
- आप चाहें तो पोर्टल से डाउनलोड कर सकते हैं या उसी CSC केंद्र से इसकी प्रिंटेड प्रति प्राप्त कर सकते हैं।
अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र की जानकारी आप आधिकारिक CSC Locator के माध्यम से भी प्राप्त कर सकते हैं।
तरीका 4: तहसील कार्यालय में जाकर ऑफलाइन आवेदन करें
यदि आप सीधे कार्यालय जाकर आवेदन करना चाहते हैं, तो अपने क्षेत्र के तहसील कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं।
- कार्यालय समय में संबंधित तहसील कार्यालय पहुंचें।
- जाति प्रमाण पत्र (अनुसूचित जनजाति) का आवेदन फॉर्म प्राप्त करें।
- फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी ध्यान से भरें और अपनी जनजाति का नाम आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार ही लिखें।
- आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, जनजाति संबंधी प्रमाण, परिवार रजिस्टर की नकल तथा अन्य जरूरी दस्तावेजों की स्व-प्रमाणित प्रतियां संलग्न करें।
- भरा हुआ आवेदन संबंधित काउंटर पर जमा करें और पावती रसीद प्राप्त कर लें।
- इसके बाद आवेदन स्थानीय जांच के लिए लेखपाल के पास भेजा जाएगा।
- लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार अंतिम निर्णय लेंगे।
- आवेदन स्वीकृत होने पर ST प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा, जिसे आप तहसील कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।
याद रखें: चाहे आवेदन e-Sathi, UP e-District, जन सेवा केंद्र या तहसील कार्यालय के माध्यम से किया गया हो, लगभग हर मामले में प्रमाण पत्र जारी होने से पहले लेखपाल द्वारा स्थानीय सत्यापन और उसके बाद तहसीलदार की अंतिम स्वीकृति अनिवार्य होती है। इसलिए आवेदन में सही जनजाति, सही जिला और सही दस्तावेज देना सबसे महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश में ST प्रमाण पत्र का आवेदन किन कारणों से खारिज हो सकता है?
यदि आवेदन करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान नहीं रखा जाता, तो अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र का आवेदन अस्वीकार हो सकता है। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक आवेदन जिला-विशिष्ट पात्रता और दस्तावेजों में त्रुटि के कारण खारिज होते हैं।
- आवेदन में दर्ज जनजाति का नाम, आधिकारिक ST अधिसूचना में दर्ज नाम से मेल नहीं खाता। उदाहरण के लिए, "गोंडी" की जगह आधिकारिक नाम "गोंड" दर्ज होना चाहिए।
- ऐसे जिले से आवेदन किया गया हो जहां संबंधित जनजाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त नहीं है।
- जनजातीय पहचान साबित करने वाले पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध न हों।
- ग्राम पंचायत के परिवार रजिस्टर में दर्ज जनजाति और आवेदन में दी गई जानकारी अलग-अलग हो।
- स्थानीय सत्यापन के दौरान लेखपाल को आवश्यक रिकॉर्ड न मिलें या आवेदक की जनजातीय पहचान की पुष्टि न हो सके।
सुझाव: आवेदन जमा करने से पहले अपनी जनजाति और जिले की पात्रता आधिकारिक ST अधिसूचना से अवश्य मिलान कर लें। यदि किसी बात को लेकर संदेह हो, तो पहले संबंधित तहसील कार्यालय से पुष्टि कर लें।
सरकारी नौकरी और प्रवेश के समय जाति सत्यापन क्यों कराया जाता है?
तहसीलदार द्वारा ST प्रमाण पत्र जारी होने के बाद भी कुछ सरकारी भर्तियों और शैक्षणिक संस्थानों में अतिरिक्त जाति सत्यापन (Caste Scrutiny) कराया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रमाण पत्र वास्तविक है और आवेदक वास्तव में अधिसूचित अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंध रखता है।
यदि किसी भर्ती या प्रवेश प्रक्रिया में जिला स्तरीय जाति जांच समिति (District Level Caste Scrutiny Committee) से सत्यापित प्रमाण पत्र जमा करने का निर्देश दिया गया हो, तो निर्धारित समय के भीतर अपना ST प्रमाण पत्र समिति के समक्ष प्रस्तुत करें। सत्यापन पूरा न होने पर चयन या नियुक्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए संबंधित भर्ती या प्रवेश की आधिकारिक अधिसूचना में दी गई शर्तों का पालन करना आवश्यक है।
उत्तर प्रदेश ST प्रमाण पत्र के प्रमुख लाभ
- उत्तर प्रदेश सरकार की नौकरियों में ST वर्ग के लिए निर्धारित 2% आरक्षण का लाभ मिलता है।
- केंद्र सरकार की नौकरियों और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में 7.5% आरक्षण का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
- राज्य के सरकारी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में आरक्षित सीटों पर प्रवेश का अवसर मिलता है।
- राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) के माध्यम से अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध पूर्व-मैट्रिक और उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्तियों के लिए आवेदन किया जा सकता है।
- जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित विभिन्न छात्रवृत्ति, शिक्षा और कल्याण योजनाओं का लाभ मिलता है।
- UPPSC, UPSSSC, पुलिस भर्ती तथा अन्य सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में नियमानुसार आयु सीमा में 5 वर्ष तक की छूट मिल सकती है।
- पात्र विद्यार्थी एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं।
- जनजातीय बहुल गांवों में लागू प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना जैसी विकास योजनाओं का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
- वन क्षेत्रों में रहने वाले पात्र जनजातीय परिवार वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत उपलब्ध अधिकारों और सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं।
आवेदन की स्थिति कैसे देखें और शिकायत कहां करें?
आवेदन जमा करने के बाद अपनी आवेदन संख्या की सहायता से e-Sathi पोर्टल पर आवेदन की वर्तमान स्थिति देख सकते हैं। यहां आपको पता चल जाएगा कि आवेदन सत्यापन में है, स्वीकृत हो चुका है या अभी किसी अधिकारी के पास लंबित है।
यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन का निस्तारण नहीं होता, तो मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर आवेदन संख्या बताकर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
यदि ST प्रमाण पत्र जारी करने से इनकार किया जाता है, जनजातीय अधिकारों का उल्लंघन होता है या अनुसूचित जनजाति से जुड़े किसी मामले में शिकायत करनी हो, तो राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) शिकायत पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।
अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध अत्याचार से संबंधित मामलों में राष्ट्रीय हेल्पलाइन 14566 पर संपर्क करें या राष्ट्रीय अत्याचार निवारण पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
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