द्वारा shahrukh
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उत्तराखण्ड में अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र एक आधिकारिक सरकारी दस्तावेज़ है, जो यह प्रमाणित करता है कि आप संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 के तहत उत्तराखण्ड में अधिसूचित किसी अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित हैं। यह प्रमाण पत्र आपके क्षेत्र के तहसीलदार या उप-जिलाधिकारी (SDM) द्वारा जारी किया जाता है। सरकारी नौकरियों में आरक्षण, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, छात्रवृत्तियों, जनजातीय कल्याण योजनाओं तथा वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act), 2006 के अंतर्गत उपलब्ध लाभ प्राप्त करने के लिए यह प्रमाण पत्र आवश्यक होता है।

उत्तराखण्ड के पात्र निवासी अपुणि सरकार पोर्टल (eservices.uk.gov.in) के माध्यम से घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह उत्तराखण्ड सरकार का आधिकारिक नागरिक सेवा पोर्टल है। यदि आप ऑनलाइन आवेदन नहीं करना चाहते, तो अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या संबंधित तहसील कार्यालय में जाकर भी आवेदन कर सकते हैं।

उत्तराखण्ड में अधिसूचित अनुसूचित जनजातियों की सूची

संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 के अनुसार उत्तराखण्ड में केवल 5 समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा प्राप्त है। यदि आप ST प्रमाण पत्र बनवाना चाहते हैं, तो आपका समुदाय नीचे दी गई आधिकारिक सूची में शामिल होना चाहिए।

  • भोटिया (Bhotia): यह समुदाय उत्तराखण्ड के ऊंचाई वाले हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों, विशेष रूप से पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जिलों में निवास करता है। शौका, मार्चा, तोलचा और जौहारी जैसे उप-समुदाय भी भोटिया समुदाय का हिस्सा हैं, जो परंपरागत रूप से ट्रांस-हिमालयी व्यापार से जुड़े रहे हैं।
  • बुक्सा (Buksa/Bhoksa): बुक्सा समुदाय मुख्य रूप से उत्तराखण्ड के तराई और भाबर क्षेत्रों में निवास करता है। हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल जिले इनके प्रमुख निवास क्षेत्र हैं।
  • जौनसारी (Jaunsari): जौनसारी समुदाय देहरादून जिले के जौनसार-बावर क्षेत्र, विशेषकर चकराता और कालसी तहसीलों में निवास करता है। दिसंबर 2024 में सामाजिक कल्याण विभाग ने जारी सत्यापन अधिसूचना के माध्यम से जौनसारी समुदाय की अनुसूचित जनजाति की मान्यता की पुष्टि की थी।
  • राजी (Raji): राजी समुदाय, जिसे वन रावत (Van Rawat) के नाम से भी जाना जाता है, उत्तराखण्ड की सबसे छोटी जनजातियों में से एक है। यह समुदाय मुख्य रूप से पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों के दूरस्थ वन क्षेत्रों में निवास करता है।
  • थारू (Tharu): थारू समुदाय नेपाल सीमा से लगे तराई क्षेत्रों में निवास करता है। उत्तराखण्ड के ऊधम सिंह नगर जिले में इस समुदाय की बड़ी आबादी रहती है।
महत्वपूर्ण: उत्तराखण्ड में केवल उपर्युक्त 5 समुदायों को ही अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित किया गया है। यदि आपका समुदाय इस आधिकारिक सूची में शामिल नहीं है, तो आप उत्तराखण्ड में ST प्रमाण पत्र के लिए पात्र नहीं होंगे।

उत्तराखण्ड में ST प्रमाण पत्र के लिए कौन आवेदन कर सकता है?

यदि आप नीचे दी गई पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं, तो उत्तराखण्ड अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं।

  • आप उत्तराखण्ड के स्थायी निवासी होने चाहिए।
  • आपका समुदाय उत्तराखण्ड की अधिसूचित अनुसूचित जनजातियों की आधिकारिक सूची में शामिल होना चाहिए।
  • आप अपने परिवार की वंशावली या अन्य स्वीकार्य अभिलेखों के माध्यम से अपने अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंध स्थापित कर सकें।
  • अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र के विपरीत, अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र के लिए किसी धर्म से संबंधित प्रतिबंध लागू नहीं है। यदि आपका समुदाय अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित है, तो धर्म की परवाह किए बिना आप आवेदन कर सकते हैं।

उत्तराखण्ड में अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र के लाभ

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा जारी अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र धारकों को राज्य सरकार और केंद्र सरकार की विभिन्न आरक्षण एवं कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सकता है। प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

  • सरकारी नौकरियों में आरक्षण: उत्तराखण्ड लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 2003 के तहत पात्र अनुसूचित जनजाति अभ्यर्थियों को राज्य सरकार की सेवाओं में 4% आरक्षण का लाभ मिलता है।
  • शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण: सरकारी महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों तथा अन्य व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर प्रवेश का लाभ मिल सकता है।
  • शुल्क में रियायत: पात्र विद्यार्थियों को सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में लागू नियमों के अनुसार ट्यूशन फीस या अन्य शैक्षणिक शुल्क में छूट मिल सकती है।
  • आयु सीमा में छूट: विभिन्न सरकारी भर्तियों में निर्धारित नियमों के अनुसार अनुसूचित जनजाति अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाती है।
  • छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ: पात्र विद्यार्थी राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) तथा अन्य सरकारी छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत पूर्व-मैट्रिक, पश्चात-मैट्रिक और अन्य छात्रवृत्तियों के लिए आवेदन कर सकते हैं।
  • वन अधिकार अधिनियम के तहत लाभ: पात्र अनुसूचित जनजाति समुदाय अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के अंतर्गत उपलब्ध व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
  • जनजातीय कल्याण योजनाएं: पात्र लाभार्थी जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार तथा उत्तराखण्ड सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनजातीय विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
  • PVTG समुदाय के लिए विशेष लाभ: उत्तराखण्ड का राजी समुदाय विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) के रूप में अधिसूचित है। इस समुदाय के पात्र सदस्य केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विशेष PVTG विकास कार्यक्रमों का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

उत्तराखण्ड में अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवश्यक दस्तावेज

आवेदन करते समय आपको पहचान, निवास और अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित दस्तावेज़ जमा करने होंगे। सत्यापन के दौरान आवश्यकता पड़ने पर सक्षम प्राधिकारी अतिरिक्त दस्तावेज भी मांग सकते हैं।

  • आवेदन पत्र: अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र का निर्धारित आवेदन पत्र, जो अपुणि सरकार पोर्टल, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या संबंधित तहसील कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है।
  • पिता या निकट संबंधी का अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र: यदि उपलब्ध हो, तो पिता का ST प्रमाण पत्र जमा करें। यदि पिता का प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, तो दादा, चाचा, भाई-बहन या किसी अन्य निकट रक्त संबंधी का ST प्रमाण पत्र तथा पारिवारिक संबंध दर्शाने वाला वंशावली शपथ पत्र प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • स्व-घोषणा पत्र / शपथ पत्र: निर्धारित प्रारूप में दिया गया शपथ पत्र, जिसमें आपके अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित होने का उल्लेख हो।
  • पता प्रमाण (कोई एक): राशन कार्ड, खाद्य सुरक्षा कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बिजली बिल, टेलीफोन बिल या सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकार किया गया कोई अन्य दस्तावेज।
  • स्थायी निवास प्रमाण: उत्तराखण्ड का मूल निवास या निवास प्रमाण पत्र, जिससे यह प्रमाणित हो कि आप राज्य के स्थायी निवासी हैं।
  • समुदाय संबंधी प्रमाण: आवश्यकता होने पर ग्राम प्रधान, जनजातीय मुखिया, वार्ड सदस्य अथवा अन्य सक्षम स्थानीय प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र, जो आपके जनजातीय समुदाय की पुष्टि करता हो।
  • पासपोर्ट आकार का फोटो: हाल ही में खिंचवाया गया रंगीन पासपोर्ट आकार का फोटो।
  • आधार कार्ड: पहचान सत्यापन के लिए आधार कार्ड की प्रति।
विशेष जानकारी: राजी (वन रावत) समुदाय के कुछ आवेदकों के पास सामान्य दस्तावेज उपलब्ध न होने की स्थिति में, सक्षम प्राधिकारी स्थानीय स्तर पर सत्यापन कर सकते हैं और आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त प्रमाण भी मांग सकते हैं। ऐसे मामलों में संबंधित जिला जनजातीय कल्याण कार्यालय या तहसील कार्यालय से मार्गदर्शन लेना उचित रहेगा।

आवेदन शुल्क, प्रमाण पत्र जारी होने का समय और वैधता

विवरण जानकारी
आवेदन शुल्क अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र के लिए ₹30 का सेवा शुल्क निर्धारित है। यदि आवेदन कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से किया जाता है, तो वहां निर्धारित अतिरिक्त सेवा शुल्क भी लिया जा सकता है।
प्रमाण पत्र जारी होने का समय आवेदन स्वीकार होने के बाद सामान्यतः 15 कार्य दिवस के भीतर प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। यदि स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त जांच की आवश्यकता हो, तो इसमें कुछ अधिक समय लग सकता है।
प्रमाण पत्र की वैधता अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र सामान्यतः आजीवन मान्य रहता है। इसे नियमित रूप से नवीनीकृत कराने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, कुछ भर्ती एजेंसियां या शैक्षणिक संस्थान हाल ही में जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के लिए कह सकते हैं।
जारी करने वाला प्राधिकारी आवेदक के क्षेत्र के तहसीलदार या उप-जिलाधिकारी (SDM)।

उत्तराखण्ड में अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

उत्तराखण्ड सरकार ने अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा अपुणि सरकार पोर्टल पर उपलब्ध कराई है। पात्र आवेदक घर बैठे आवेदन कर सकते हैं, आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं और आवेदन की स्थिति भी ऑनलाइन देख सकते हैं।

चरण 1: अपुणि सरकार पोर्टल पर अपना खाता बनाएं

  1. eservices.uk.gov.in पर जाएं और अपुणि सरकार पोर्टल खोलें।
  2. पर्सनल लॉगिन विकल्प चुनें और यहां पंजीकरण करें (Sign Up) पर क्लिक करें।
  3. अपना नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, जन्म तिथि, जिला, तहसील, पता तथा अन्य आवश्यक जानकारी दर्ज करें।
  4. OTP सत्यापन पूरा करके पंजीकरण करें। इसके बाद आपकी यूजर आईडी और पासवर्ड पंजीकृत मोबाइल नंबर पर SMS के माध्यम से भेज दिए जाएंगे।

चरण 2: अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करें

  1. अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड की सहायता से पोर्टल पर लॉगिन करें।
  2. Request New Application विकल्प पर क्लिक करें।
  3. विभाग के रूप में राजस्व विभाग (Revenue Department) चुनें।
  4. सेवाओं की सूची में Tribe Certificate (ST) या जनजाति प्रमाण पत्र सेवा का चयन करें।
  5. आवेदन पत्र में अपना नाम, माता-पिता का नाम, जन्म तिथि, पता, जनजाति का नाम तथा अन्य आवश्यक जानकारी सावधानीपूर्वक भरें।
  6. निर्धारित प्रारूप में सभी आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें।
  7. ऑनलाइन आवेदन शुल्क का भुगतान करें और आवेदन सबमिट कर दें।
  8. आवेदन सफलतापूर्वक जमा होने के बाद आपको एक Application Number प्राप्त होगा। भविष्य में आवेदन की स्थिति देखने के लिए इसे सुरक्षित रखें।
सुझाव: आवेदन जमा करने से पहले सभी विवरण एक बार अवश्य जांच लें। गलत जानकारी या अस्पष्ट दस्तावेज़ों के कारण आवेदन की प्रक्रिया में देरी हो सकती है।

अपुणि सरकार मोबाइल ऐप से ST प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कैसे करें?

यदि आप मोबाइल फोन से आवेदन करना चाहते हैं, तो उत्तराखण्ड सरकार का आधिकारिक Apuni Sarkar App भी उपलब्ध है। यह Android और iPhone दोनों के लिए जारी किया गया है। इसके माध्यम से आवेदन करना, आवेदन की स्थिति देखना और कई अन्य सरकारी सेवाओं का लाभ लेना आसान हो जाता है।

अपुणि सरकार मोबाइल ऐप डाउनलोड करें:

  1. अपने मोबाइल में Apuni Sarkar App इंस्टॉल करें।
  2. मोबाइल नंबर की सहायता से लॉगिन करें या नया खाता बनाएं।
  3. राजस्व विभाग की सेवाओं में जाकर Tribe Certificate (ST) सेवा चुनें।
  4. आवेदन पत्र भरें और आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें।
  5. ऑनलाइन शुल्क का भुगतान करके आवेदन जमा करें।
  6. आवेदन संख्या सुरक्षित रखें और समय-समय पर ऐप के माध्यम से उसकी स्थिति जांचते रहें।

कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से आवेदन कैसे करें?

यदि आपके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है या स्वयं ऑनलाइन आवेदन करने में कठिनाई हो रही है, तो आप अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की सहायता ले सकते हैं।

  1. सभी आवश्यक दस्तावेज़ों की मूल प्रतियां और फोटोकॉपी लेकर नजदीकी CSC पर जाएं।
  2. CSC संचालक आपके दस्तावेज़ों के आधार पर अपुणि सरकार पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन भर देगा।
  3. निर्धारित आवेदन शुल्क तथा CSC सेवा शुल्क का भुगतान करें।
  4. आवेदन जमा होने के बाद प्राप्त रसीद या आवेदन संख्या अपने पास सुरक्षित रखें।

आवेदन की प्रगति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी समय-समय पर आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर SMS के माध्यम से भी भेजी जाती है।

ST प्रमाण पत्र डाउनलोड कैसे करें?

आवेदन स्वीकृत होने के बाद अपुणि सरकार पोर्टल या मोबाइल ऐप में लॉगिन करें। इसके बाद मेरे आवेदन (My Applications) या जारी किए गए प्रमाण पत्र (Issued Certificates) अनुभाग में जाकर अपना डिजिटल हस्ताक्षरित अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। यदि किसी कारणवश डाउनलोड का विकल्प उपलब्ध न हो, तो संबंधित तहसील कार्यालय से भी प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।

अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र आवेदन की स्थिति कैसे जांचें?

आवेदन जमा करने के बाद उसकी प्रगति ऑनलाइन देखी जा सकती है। इसके लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:

  1. eservices.uk.gov.in पर जाएं और अपने खाते में लॉगिन करें।
  2. आवेदन की स्थिति जानें (Know Application Status) विकल्प चुनें।
  3. अपनी आवेदन संख्या दर्ज करके स्थिति देखें पर क्लिक करें।

इसके बाद स्क्रीन पर आपके आवेदन की वर्तमान स्थिति दिखाई दे जाएगी। आवेदन से जुड़ी प्रत्येक महत्वपूर्ण जानकारी आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर SMS के माध्यम से भी भेजी जाती है।

हेल्पलाइन और संपर्क विवरण

  • अपुणि सरकार हेल्पलाइन: 1800-3000-2300
  • आधिकारिक पोर्टल: eservices.uk.gov.in
  • सामाजिक कल्याण विभाग हेल्पलाइन: 1800-180-4236
  • यदि आपको अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र, पात्रता या जनजातीय कल्याण योजनाओं से संबंधित कोई जानकारी चाहिए, तो अपने जिले के जिला जनजातीय कल्याण अधिकारी या संबंधित तहसील कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

Frequently Asked Questions

उत्तराखण्ड में इसे आधिकारिक रूप से जनजाति प्रमाण पत्र (Janjati Praman Patra) कहा जाता है। यह प्रमाण पत्र तहसीलदार या उप-जिलाधिकारी (SDM) द्वारा जारी किया जाता है और यह प्रमाणित करता है कि धारक राज्य की अधिसूचित अनुसूचित जनजाति समुदायों में से किसी एक से संबंधित है।

उत्तराखण्ड में केवल पांच समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है, भोटिया, बुक्सा, जौनसारी, राजी और थारू। यदि आपका समुदाय इस सूची में शामिल नहीं है, तो आप उत्तराखण्ड में ST प्रमाण पत्र के लिए पात्र नहीं होंगे।

इसके लिए उत्तराखण्ड सरकार के आधिकारिक अपुणि सरकार पोर्टल (eservices.uk.gov.in) का उपयोग किया जाता है। आप स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की सहायता से भी आवेदन जमा कर सकते हैं।

ST प्रमाण पत्र के लिए ₹30 का सेवा शुल्क निर्धारित है। यदि आवेदन कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से किया जाता है, तो वहां निर्धारित अतिरिक्त सेवा शुल्क भी देना पड़ सकता है।

आवेदन स्वीकार होने के बाद सामान्यतः 15 कार्य दिवस के भीतर प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। यदि स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त जांच की आवश्यकता हो, तो इसमें कुछ अधिक समय लग सकता है।

नहीं। यदि आपका समुदाय उत्तराखण्ड की अधिसूचित अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल है, तो धर्म की परवाह किए बिना आप ST प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं।

हां। जौनसारी समुदाय उत्तराखण्ड की अधिसूचित अनुसूचित जनजातियों में शामिल है। यह समुदाय मुख्य रूप से देहरादून जिले के जौनसार-बावर क्षेत्र, विशेषकर चकराता और कालसी तहसीलों में निवास करता है।

राजी समुदाय, जिसे वन रावत के नाम से भी जाना जाता है, उत्तराखण्ड की सबसे छोटी जनजातियों में से एक है। इसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) के रूप में भी अधिसूचित किया गया है। यह समुदाय मुख्य रूप से पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों में निवास करता है।

हां। यदि आप उत्तराखण्ड के स्थायी निवासी हैं और किसी अधिसूचित अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंध रखते हैं, तो राज्य के किसी भी जिले में रहने के बावजूद आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, सत्यापन आपके स्थायी निवास और अन्य अभिलेखों के आधार पर किया जाएगा।

हां। उत्तराखण्ड के सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ST प्रमाण पत्र का उपयोग वहां किया जा सकता है, जहां केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार वैध अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र स्वीकार किया जाता है। संबंधित भर्ती या योजना की पात्रता शर्तों की जांच अवश्य करें।

यदि पिता का ST प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, तो आप दादा, चाचा, भाई-बहन या किसी अन्य निकट रक्त संबंधी का ST प्रमाण पत्र तथा वंशावली शपथ पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर तहसीलदार स्थानीय स्तर पर सत्यापन भी करवा सकते हैं।

नहीं। अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र सामान्यतः आजीवन मान्य रहता है और इसका नवीनीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, कुछ भर्ती एजेंसियां या शैक्षणिक संस्थान हाल ही में जारी प्रमाण पत्र मांग सकते हैं।

हां। पात्र विद्यार्थी राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) पर उपलब्ध अनुसूचित जनजाति छात्रवृत्ति योजनाओं में आवेदन करते समय उत्तराखण्ड में जारी ST प्रमाण पत्र का उपयोग कर सकते हैं। आवेदन के दौरान प्रमाण पत्र की स्पष्ट स्कैन प्रति अपलोड करनी होगी।

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