द्वारा shahrukh
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बिहार में अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय मुख्य रूप से पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण तथा पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे कई पूर्वी जिलों में निवास करते हैं। वर्ष 2000 में झारखंड राज्य बनने के बाद संथाल परगना का बड़ा जनजातीय क्षेत्र नए राज्य में शामिल हो गया, लेकिन इसके बावजूद बिहार में आज भी 33 अनुसूचित जनजाति समुदाय आधिकारिक रूप से अधिसूचित हैं। इन समुदायों के सदस्य बिहार के RTPS पोर्टल के माध्यम से अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं।

कई लोगों को यह भ्रम रहता है कि अनुसूचित जनजाति (ST) और अनुसूचित जाति (SC) के लिए अलग-अलग आवेदन प्रक्रिया होती है। वास्तव में दोनों प्रमाण-पत्रों के लिए एक ही RTPS पोर्टल, एक ही अंचल अधिकारी और वही निर्धारित आवेदन प्रपत्र उपयोग किए जाते हैं। इस लेख में बिहार के अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण-पत्र से जुड़ी पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में समझाई गई है।

बिहार में अधिसूचित अनुसूचित जनजातियां

संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 के अनुसार बिहार में निम्नलिखित समुदाय अनुसूचित जनजाति (ST) के रूप में अधिसूचित हैं:

  • असुर, अगरिया, बैगा, बंजारा, बाथुड़ी, बेड़िया, बिंझिया और बिरहोर
  • बिरजिया, चेरो, चिक बराइक, गोंड, गोरैत, हो और करमाली
  • खड़िया (ढेलकी खड़िया, दूध खड़िया एवं हिल खड़िया सहित), खरवार, खोंड, किसान और नागेसिया
  • कोरा, मुड़ी-कोरा, कोरवा, लोहरा, महली, माल पहाड़िया और कुमारभाग पहाड़िया
  • मुंडा, पातर, उरांव (धनगर उरांव सहित), परहैया, संथाल, सौरिया पहाड़िया, सावर, कवार, कोल और थारू

इनमें थारू समुदाय मुख्य रूप से पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण जिलों में निवास करता है। वहीं संथाल समुदाय की उल्लेखनीय आबादी कटिहार, पूर्णिया और अररिया जैसे पूर्वी जिलों में रहती है। उरांव, मुंडा और हो समुदाय के लोग भी बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाते हैं, हालांकि इनकी बड़ी आबादी झारखंड राज्य में है।

यदि आपको यह स्पष्ट नहीं है कि आपका समुदाय बिहार की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल है या नहीं, तो आवेदन करने से पहले अपने क्षेत्र के अंचल अधिकारी कार्यालय से इसकी पुष्टि अवश्य कर लें।

महत्वपूर्ण नियम: आपकी जनजाति बिहार की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल होनी चाहिए

बिहार में अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण-पत्र के आवेदन अस्वीकार होने का सबसे सामान्य कारण यही होता है कि आवेदक की जनजाति बिहार के लिए अधिसूचित सूची में शामिल नहीं होती। केवल किसी दूसरे राज्य में अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने से बिहार में भी वही दर्जा स्वतः मान्य नहीं हो जाता। आपकी जनजाति का नाम संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 के तहत बिहार के लिए अधिसूचित होना आवश्यक है।

उदाहरण के लिए संथाल, उरांव और मुंडा जैसी जनजातियां बिहार और झारखंड, दोनों राज्यों में अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित हैं। इसलिए इन समुदायों के सदस्यों को इस संबंध में कोई समस्या नहीं होती। वहीं कुछ जनजातियां केवल एक या कुछ राज्यों के लिए ही अधिसूचित हैं। ऐसे मामलों में बिहार में अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया जा सकता।

बिहार में अधिकांश अनुसूचित जनजातियों के लिए जिला-वार कोई अलग पात्रता निर्धारित नहीं है। यदि आपकी जनजाति बिहार की अधिसूचित अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल है, तो सामान्यतः वह राज्य के सभी जिलों में मान्य होती है।

बिहार अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र की मुख्य जानकारी

  • प्रमाण-पत्र का नाम: अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण-पत्र।
  • जारी करने वाला अधिकारी: अंचल स्तर पर अंचल अधिकारी।
  • आवेदन शुल्क: बिहार में अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए कोई सरकारी शुल्क नहीं लिया जाता।
  • वैधता: यह प्रमाण-पत्र आजीवन मान्य रहता है। सामान्य परिस्थितियों में इसकी वैधता समाप्त नहीं होती।
  • सामान्य निस्तारण अवधि: अंचल स्तर पर आवेदन का निस्तारण सामान्यतः 10 कार्य दिवस में किया जाता है।
  • तत्काल सेवा: तत्काल सेवा के तहत अंचल अधिकारी को 2 कार्य दिवस के भीतर प्रमाण-पत्र जारी करना होता है।
  • आवश्यक प्रपत्र: आवेदन के साथ Form-I, Form-II और Form-III संलग्न किए जाते हैं।
  • जनजाति निर्धारण का नियम: अनुसूचित जनजाति की पात्रता आवेदक के पिता की जनजाति के आधार पर निर्धारित की जाती है, न कि पति की जनजाति के आधार पर।

बिहार में अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण-पत्र के स्तर

बिहार में अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण-पत्र तीन स्तरों पर जारी किया जाता है। हालांकि, अधिकांश लोगों को केवल अंचल स्तर का प्रमाण-पत्र ही बनवाना पड़ता है। उच्च स्तर का प्रमाण-पत्र तभी आवश्यक होता है, जब किसी सरकारी विभाग, भर्ती या शिक्षण संस्थान द्वारा विशेष रूप से उसकी मांग की जाए।

  • अंचल स्तर: यह प्रमाण-पत्र अंचल अधिकारी जारी करते हैं। छात्रवृत्ति, कॉलेज में प्रवेश, सरकारी योजनाओं और अधिकांश सरकारी कार्यों के लिए सामान्यतः यही प्रमाण-पत्र पर्याप्त होता है। सामान्य प्रक्रिया में इसे 10 कार्य दिवस में और तत्काल सेवा के तहत 2 कार्य दिवस में जारी किया जाता है।
  • अनुमंडल स्तर: यह प्रमाण-पत्र अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) जारी करते हैं। इसके लिए पहले से जारी अंचल स्तर का प्रमाण-पत्र आधार के रूप में आवश्यक होता है। जहां विशेष रूप से SDO स्तर का प्रमाण-पत्र मांगा जाता है, वहीं इस स्तर पर आवेदन करना चाहिए।
  • जिला स्तर: यह सबसे उच्च स्तर का प्रमाण-पत्र होता है, जिसे जिलाधिकारी (DM) जारी करते हैं। इसके लिए पहले से जारी अनुमंडल स्तर का प्रमाण-पत्र आवश्यक होता है। इसका उपयोग केवल उन्हीं मामलों में किया जाता है, जहां संबंधित विभाग या संस्था जिला स्तर का प्रमाण-पत्र मांगती है।

बिहार में अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण-पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

बिहार में अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण-पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन serviceonline.bihar.gov.in पोर्टल पर किया जाता है। यही पोर्टल आय, आवासीय और अन्य RTPS सेवाओं के लिए भी उपयोग किया जाता है। नीचे पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में समझाई गई है।

  1. सबसे पहले serviceonline.bihar.gov.in वेबसाइट खोलें।
  2. यदि आपने पहले कभी इस पोर्टल का उपयोग नहीं किया है, तो Register Yourself पर क्लिक करके अपना खाता बनाएं। इसके बाद Login ID और Password की सहायता से लॉगिन करें।
  3. लॉगिन करने के बाद बाईं ओर दिए गए Left Menu में जाएं। वहां संबंधित विभाग चुनें और जाति प्रमाण-पत्र (अनुसूचित जनजाति - ST) सेवा पर क्लिक करें।
  4. अब Apply for Service विकल्प चुनें और आवेदन फॉर्म भरना शुरू करें।
  5. फॉर्म भरते समय अपनी जनजाति का नाम बिल्कुल उसी प्रकार लिखें, जैसा बिहार की आधिकारिक अनुसूचित जनजाति सूची में दर्ज है। नाम या वर्तनी में अंतर होने पर आवेदन अस्वीकार हो सकता है।
  6. इसके बाद वेबकैम से अपनी फोटो लें या मोबाइल अथवा कंप्यूटर में मौजूद फोटो अपलोड करें।
  7. अब अपना आधार कार्ड नंबर दर्ज करें। सत्यापन के लिए आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर OTP आएगा। यदि मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं है, तो निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य 12 पहचान दस्तावेजों में से किसी एक का उपयोग किया जा सकता है।
  8. Save Draft पर क्लिक करके आवेदन सुरक्षित करें। इसके बाद Form-II और Form-III सहित सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
  9. एक बार पूरी जानकारी ध्यान से जांच लें। यदि सब कुछ सही है, तो Submit पर क्लिक करके आवेदन जमा कर दें।
  10. आवेदन सफलतापूर्वक जमा होने के बाद Acknowledgement (पावती) डाउनलोड करें और उसमें दी गई आवेदन संख्या सुरक्षित रखें।
  11. प्रमाण-पत्र जारी होने के बाद वह आपके पोर्टल के Inbox में उपलब्ध हो जाएगा। वहां से आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं या आवश्यकता होने पर इसकी मुद्रित प्रति निकाल सकते हैं।

आवेदन की प्रगति से जुड़ी प्रत्येक जानकारी आपको SMS और ईमेल के माध्यम से भेजी जाती है। इसलिए आवेदन करते समय अपना सही मोबाइल नंबर और ईमेल पता अवश्य दर्ज करें।

RTPS काउंटर से ऑफलाइन आवेदन कैसे करें?

यदि आपके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है या आप स्वयं ऑनलाइन आवेदन नहीं करना चाहते, तो नजदीकी RTPS काउंटर पर जाकर भी अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन किया जा सकता है। यह सुविधा ग्राम पंचायत, प्रखंड, अंचल, अनुमंडल और जिला कार्यालयों में उपलब्ध है।

  1. सबसे पहले अपने नजदीकी RTPS काउंटर पर जाएं।
  2. Form-I भरें और उसके साथ Form-II तथा Form-III सहित सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें। यदि फॉर्म उपलब्ध नहीं हैं, तो काउंटर से भी प्राप्त किए जा सकते हैं।
  3. सभी दस्तावेज कार्यपालक सहायक के पास जमा करें।
  4. कार्यपालक सहायक आपकी ओर से serviceonline.bihar.gov.in पोर्टल पर आवेदन दर्ज करेंगे। इसी दौरान आपकी फोटो भी अपलोड की जाएगी।
  5. इसके बाद आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर प्राप्त OTP के माध्यम से पहचान का सत्यापन किया जाएगा।
  6. आवेदन जमा होने के बाद आपको पावती दी जाएगी। इसमें आवेदन संख्या और प्रमाण-पत्र जारी होने की संभावित तिथि दर्ज रहेगी।
  7. इसके बाद संबंधित अधिकारी आपके निवास और जनजाति से जुड़ी जानकारी का आवश्यक सत्यापन करेंगे।
  8. प्रमाण-पत्र जारी होने के बाद आप RTPS काउंटर से इसकी मुद्रित प्रति प्राप्त कर सकते हैं या पोर्टल पर लॉगिन करके इसे डाउनलोड भी कर सकते हैं।

तत्काल सेवा से 2 कार्य दिवस में अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण-पत्र कैसे प्राप्त करें?

यदि आपको अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण-पत्र की तुरंत आवश्यकता है, तो बिहार RTPS की तत्काल सेवा का उपयोग किया जा सकता है। इस सुविधा के अंतर्गत अंचल अधिकारी को आवेदन प्राप्त होने की तारीख से 2 कार्य दिवस के भीतर प्रमाण-पत्र जारी करना होता है।

यह सुविधा केवल अंचल स्तर के आवेदन के लिए उपलब्ध है। ऑनलाइन आवेदन करते समय serviceonline.bihar.gov.in पोर्टल पर या RTPS काउंटर के माध्यम से आवेदन करते समय तत्काल सेवा का विकल्प चुना जा सकता है। आवेदन जमा करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि सभी आवश्यक दस्तावेज सही और पूरे हैं, ताकि सत्यापन में कोई देरी न हो।

यदि निर्धारित समय में प्रमाण-पत्र जारी न हो तो क्या करें?

बिहार लोक सेवाओं का अधिकार (RTPS) अधिनियम के अनुसार सामान्य आवेदन का निस्तारण 10 कार्य दिवस में और तत्काल सेवा के आवेदन का निस्तारण 2 कार्य दिवस में किया जाना चाहिए। यदि तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी प्रमाण-पत्र जारी नहीं होता, तो आप अपील करने के हकदार हैं।

  • पहली अपील: अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के समक्ष की जाती है। उन्हें 15 कार्य दिवस के भीतर अपील का निस्तारण करना होता है।
  • पुनरीक्षण: यदि पहली अपील के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता, तो जिलाधिकारी (DM) के समक्ष पुनरीक्षण के लिए आवेदन किया जा सकता है। उन्हें भी 15 कार्य दिवस के भीतर निर्णय देना होता है।

ऑनलाइन अपील दर्ज करने के लिए rtpsappeal.bihar.gov.in पोर्टल का उपयोग करें। अपील करते समय आवेदन की पावती संख्या (Acknowledgement Number) अपने पास रखें।

बिहार अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र के लाभ

  • बिहार सरकार की नौकरियों में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए निर्धारित आरक्षण का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
  • केंद्र सरकार की नौकरियों और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में उपलब्ध 7.5% आरक्षण का लाभ मिलता है।
  • बिहार के सरकारी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में आरक्षित सीटों पर प्रवेश का अवसर मिलता है।
  • National Scholarship Portal के माध्यम से प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक जनजातीय छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए आवेदन किया जा सकता है।
  • राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिकतम 5 वर्ष तक की आयु सीमा में छूट उपलब्ध होती है।
  • अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए संचालित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय तथा अन्य जनजातीय कल्याण योजनाओं का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
  • वन क्षेत्रों में रहने वाले पात्र जनजातीय समुदाय वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत उपलब्ध अधिकारों और सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
  • जनजातीय परिवारों को विभिन्न सरकारी आवास, आजीविका और कल्याणकारी योजनाओं में प्राथमिकता दी जाती है।

Frequently Asked Questions

हां। थारू समुदाय बिहार में अनुसूचित जनजाति (ST) के रूप में अधिसूचित है। यदि आप बिहार के निवासी हैं और थारू समुदाय से संबंध रखते हैं, तो RTPS पोर्टल या नजदीकी RTPS काउंटर के माध्यम से अनुसूचित जनजाति जाति प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं।

हां। संथाल समुदाय बिहार की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल है। कटिहार, पूर्णिया, अररिया सहित अन्य जिलों में रहने वाले पात्र संथाल समुदाय के लोग बिहार से ST जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सकते हैं।

केवल बिहार में निवास करना पर्याप्त नहीं है। आपकी जनजाति का नाम बिहार के लिए अधिसूचित अनुसूचित जनजाति सूची में भी होना चाहिए। यदि आपकी जनजाति केवल झारखंड की सूची में शामिल है और बिहार की सूची में नहीं है, तो बिहार से ST प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया जाएगा।

नहीं। दोनों प्रमाण-पत्रों के लिए RTPS का वही पोर्टल, वही आवेदन प्रक्रिया और वही जारी करने वाला अधिकारी होता है। अंतर केवल इतना है कि आवेदन करते समय आपको अपनी श्रेणी के अनुसार अनुसूचित जनजाति (ST) सेवा का चयन करना होता है और अपनी जनजाति का सही नाम दर्ज करना होता है।

नहीं। बिहार में महाराष्ट्र की तरह ST प्रमाण-पत्र के लिए अलग से Caste Scrutiny Committee की अनिवार्य व्यवस्था नहीं है। प्रमाण-पत्र RTPS प्रक्रिया के अनुसार सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया जाता है। हालांकि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभाग अपने स्तर पर दस्तावेजों का सत्यापन कर सकता है।

नहीं। अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए कोई आय सीमा निर्धारित नहीं है। यदि आपकी जनजाति बिहार की अधिसूचित सूची में शामिल है और आप अन्य आवश्यक शर्तें पूरी करते हैं, तो आवेदन कर सकते हैं।

हां। यदि आपकी जनजाति बिहार के लिए अधिसूचित अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल है, तो यह प्रमाण-पत्र UPSC, केंद्र सरकार की भर्तियों तथा केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में लागू नियमों के अनुसार मान्य होता है। अनुसूचित जनजाति श्रेणी पर Creamy Layer लागू नहीं होती।

सबसे पहले अस्वीकृति आदेश में दर्ज कारण को ध्यान से पढ़ें। यदि आपको लगता है कि आवेदन गलत कारण से अस्वीकार किया गया है, तो RTPS अपील पोर्टल पर प्रथम अपील दर्ज कर सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर पुनरीक्षण का भी विकल्प उपलब्ध है। यदि अनुसूचित जनजाति से जुड़े अधिकारों के उल्लंघन का मामला हो, तो राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (ncst.nic.in) में भी शिकायत की जा सकती है।

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