राजस्थान में अनुसूचित जनजातियों की सबसे अधिक आबादी दो प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों में रहती है। पूर्वी राजस्थान के जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर और आसपास के जिलों में मीणा (Mina/Meena) समुदाय बड़ी संख्या में निवास करता है। वहीं दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी क्षेत्र, जैसे उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और राजसमंद, मुख्य रूप से भील समुदाय के निवास क्षेत्र माने जाते हैं।
राजस्थान में अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र के लिए आवेदन SSO ID और eMitra प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाता है। आवेदन की प्रक्रिया भले ही अन्य जाति प्रमाण पत्रों जैसी हो, लेकिन ST प्रमाण पत्र जारी करने से पहले यह देखा जाता है कि आवेदक का समुदाय राजस्थान के लिए अधिसूचित अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल है या नहीं। इसलिए आवेदन शुरू करने से पहले अपनी जनजाति की आधिकारिक स्थिति की पुष्टि कर लेना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
राजस्थान में अधिसूचित अनुसूचित जनजातियां (ST)
राजस्थान में ST प्रमाण पत्र केवल उन्हीं व्यक्तियों को जारी किया जाता है जिनकी जनजाति संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 के अंतर्गत राजस्थान के लिए अधिसूचित है। राज्य में मान्यता प्राप्त प्रमुख अनुसूचित जनजातियां निम्नलिखित हैं:
- भील समूह: भील, भील गरासिया, ढोली भील, डूंगरी भील, डूंगरी गरासिया, मेवासी भील, रावल भील, तड़वी भील, भगालिया, भीलाला, पावरा, वसावा और वसावे।
- भील मीणा: भील मीणा।
- डामोर समूह: डामोर और डामरिया।
- धांका समूह: धांका, तड़वी, टेटारिया और वालवी।
- गरासिया समूह: गरासिया (राजपूत गरासिया को छोड़कर)।
- कठोड़ी समूह: कठोड़ी, कटकारी, धोर कठोड़ी, धोर कटकारी, सोन कठोड़ी और सोन कटकारी।
- कोकना समूह: कोकना, कोकनी, कुकना, कोली धोर, टोकरे कोली, कोलचा और कोलघा।
- मीणा (Mina): मीणा।
- नायकड़ा समूह: नायकड़ा, नायका, चोलीवाला नायका, कपाड़िया नायका, मोटा नायका और नाना नायका।
- अन्य अधिसूचित जनजातियां: पटेलिया तथा सहरिया (जिसे सेहरिया या सेहरिया भी कहा जाता है)।
राजस्थान की अनुसूचित जनजातियों में मीणा (Mina) सबसे बड़ा समुदाय है, जिसकी आबादी मुख्य रूप से पूर्वी राजस्थान के जिलों में केंद्रित है। इसके बाद भील समुदाय का स्थान आता है, जिसकी अधिकतर आबादी दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में निवास करती है।
इसी प्रकार गरासिया समुदाय भी राज्य की प्रमुख अनुसूचित जनजातियों में शामिल है और इसका निवास मुख्य रूप से सिरोही, पाली तथा उदयपुर जिलों में है। हालांकि, राजस्थान की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार राजपूत गरासिया को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। इसलिए इस उपसमुदाय के सदस्य ST प्रमाण पत्र के लिए पात्र नहीं माने जाते।
आवेदन से पहले इन महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी जरूर रखें
गरासिया समुदाय के लिए विशेष नियम
राजस्थान में अनुसूचित जनजातियों की आधिकारिक सूची में गरासिया समुदाय को शामिल किया गया है, लेकिन इस सूची में राजपूत गरासिया को स्पष्ट रूप से अपवर्जित (Excluded) रखा गया है। इसका अर्थ है कि यदि आपका समुदाय राजपूत गरासिया के रूप में दर्ज है, तो आपको राजस्थान में ST प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा। इसलिए आवेदन भरने से पहले अपने परिवार के सरकारी रिकॉर्ड और समुदाय का वर्गीकरण अवश्य जांच लें, ताकि गलत श्रेणी में आवेदन करने से बचा जा सके।
ST प्रमाण पत्र के लिए धर्म कोई पात्रता शर्त नहीं है
अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र के मामले में धर्म के आधार पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं है। यदि आपकी जनजाति राजस्थान की अधिसूचित ST सूची में शामिल है, तो आप किसी भी धर्म से संबंध रखते हों, ST प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, भील, मीणा और अन्य अधिसूचित जनजातियों के पात्र सदस्य अपने धार्मिक विश्वास की परवाह किए बिना इस प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने के अधिकार रखते हैं।
सहरिया (Sahariya): राजस्थान का विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG)
राजस्थान में सहरिया (जिसे सेहरिया या सहरिया भी कहा जाता है) समुदाय को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (Particularly Vulnerable Tribal Group - PVTG) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इस समुदाय की सबसे अधिक आबादी बारां जिले की शाहाबाद और किशनगंज तहसीलों में निवास करती है।
सहरिया परिवारों को अनुसूचित जनजाति वर्ग के सामान्य आरक्षण और कल्याणकारी लाभों के साथ-साथ PVTG समुदायों के लिए संचालित विशेष विकास कार्यक्रमों का भी लाभ मिलता है। इन योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए वैध ST प्रमाण पत्र सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है।
ST प्रमाण पत्र जारी करने वाला अधिकारी
राजस्थान में अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार या उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) के पास होता है। आवेदन प्राप्त होने के बाद राजस्व विभाग आवश्यक दस्तावेजों की जांच करता है। जरूरत पड़ने पर संबंधित पटवारी स्थानीय स्तर पर आवेदक की जनजाति और निवास संबंधी जानकारी का सत्यापन करता है। सत्यापन रिपोर्ट संतोषजनक पाए जाने पर सक्षम अधिकारी प्रमाण पत्र जारी करते हैं।
राजस्थान ST प्रमाण पत्र के लिए आवश्यक दस्तावेज
- आधार कार्ड या विभाग द्वारा स्वीकार किया गया अन्य पहचान दस्तावेज।
- जन आधार कार्ड अथवा जन आधार नामांकन संख्या।
- जनजाति संबंधी प्रमाण, जैसे:
- पिता, माता, दादा या अन्य निकट संबंधी का पुराना ST प्रमाण पत्र।
- विद्यालय का रिकॉर्ड, जिसमें आपकी जनजाति का नाम दर्ज हो।
- कोई अन्य सरकारी दस्तावेज, जिसमें आपकी जनजाति का उल्लेख किया गया हो।
- राशन कार्ड।
- राजस्थान मूल निवास प्रमाण पत्र।
- जन्म प्रमाण पत्र, विद्यालय त्याग प्रमाण पत्र (School Leaving Certificate) या जन्म तिथि दर्शाने वाला अन्य मान्य दस्तावेज।
- हाल ही का पासपोर्ट आकार का रंगीन फोटो।
सुझाव: आवेदन जमा करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आधार, जन आधार और अन्य सभी दस्तावेजों में आपका नाम, पता तथा पारिवारिक विवरण एक-दूसरे से मेल खाते हों। रिकॉर्ड में अंतर होने पर सत्यापन में अतिरिक्त समय लग सकता है।
राजस्थान ST प्रमाण पत्र के लिए आवेदन प्रक्रिया
राजस्थान सरकार अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध कराती है। यदि आपके पास SSO ID है, तो आप स्वयं eMitra पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। वहीं, जिन लोगों के पास इंटरनेट या ऑनलाइन आवेदन की सुविधा नहीं है, वे किसी भी अधिकृत eMitra केंद्र की सहायता ले सकते हैं। आवेदन शुरू करने से पहले जन आधार, आधार कार्ड और जनजाति से संबंधित सभी दस्तावेज तैयार रखें।
ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया (SSO ID के माध्यम से)
- राजस्थान SSO पोर्टल खोलें और अपनी SSO ID से साइन इन करें। यदि अभी तक SSO ID नहीं बनाई है, तो आधार, जन आधार या मोबाइल नंबर की मदद से नया पंजीकरण पूरा करें।
- लॉगिन के बाद डैशबोर्ड पर उपलब्ध eMitra सेवा को शुरू करें और राजस्व विभाग की सेवाओं में जाति प्रमाण पत्र विकल्प चुनें।
- प्रमाण पत्र की श्रेणी में अनुसूचित जनजाति (ST) का चयन करें। आवेदन करते समय अपनी जनजाति का वही नाम दर्ज करें जो राजस्थान की अधिसूचित ST सूची में दर्ज है।
- अब आवेदन पत्र में अपना नाम, जन आधार संख्या, पता, परिवार का विवरण तथा अन्य मांगी गई जानकारी सावधानीपूर्वक भरें। सभी विवरण आधार और जन आधार के रिकॉर्ड से मेल खाने चाहिए।
- इसके बाद जनजाति संबंधी प्रमाण, पहचान प्रमाण, निवास प्रमाण तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में अपलोड करें।
- पूरे आवेदन की एक बार पुनः जांच करें। विशेष रूप से जनजाति का नाम, परिवार का विवरण और पता सही होने की पुष्टि कर लें।
- सभी जानकारी सही मिलने पर आवेदन सबमिट करें। आवेदन सफल होने के बाद स्क्रीन पर एक रेफरेंस नंबर दिखाई देगा, जिसे भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।
- इसके बाद राजस्व विभाग आवश्यकता पड़ने पर संबंधित पटवारी से स्थानीय जांच करवाता है। जांच पूरी होने के बाद आवेदन सक्षम अधिकारी के पास भेजा जाता है।
- आवेदन स्वीकृत होने पर अपने SSO खाते में दोबारा लॉगिन करें और डिजिटल हस्ताक्षर वाला ST प्रमाण पत्र डाउनलोड कर लें।
महत्वपूर्ण: यदि आवेदन में दर्ज जानकारी और जन आधार रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है, तो विभाग अतिरिक्त सत्यापन कर सकता है। इससे प्रमाण पत्र जारी होने में अतिरिक्त समय लग सकता है।
eMitra केंद्र से आवेदन कैसे करें
अगर आप स्वयं ऑनलाइन आवेदन नहीं करना चाहते, तो राजस्थान के किसी भी अधिकृत eMitra केंद्र से आवेदन कराया जा सकता है। यह तरीका विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों के आवेदकों के लिए सुविधाजनक माना जाता है।
- अपने साथ जन आधार कार्ड, आधार कार्ड, जनजाति संबंधी प्रमाण, मूल निवास प्रमाण पत्र तथा हाल ही का पासपोर्ट आकार का फोटो लेकर eMitra केंद्र पहुंचें।
- eMitra संचालक आपके दस्तावेजों के आधार पर सरकारी पोर्टल में आवेदन तैयार करेगा। आवेदन पूरा होने से पहले सभी विवरण स्वयं पढ़कर अवश्य जांच लें।
- दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड होने के बाद संचालक आवेदन ऑनलाइन जमा कर देगा।
- निर्धारित सेवा शुल्क जमा करें और आवेदन की रसीद प्राप्त करें। इसी रसीद पर आपका रेफरेंस नंबर दर्ज रहेगा।
- आवेदन राजस्व विभाग को भेज दिया जाएगा, जहां आवश्यक होने पर पटवारी द्वारा स्थानीय सत्यापन किया जाएगा।
- प्रमाण पत्र जारी होने के बाद आप चाहें तो अपने SSO खाते से डाउनलोड कर सकते हैं या उसी eMitra केंद्र से उसकी प्रिंटेड प्रति प्राप्त कर सकते हैं।
सुझाव: आवेदन करते समय अपनी जनजाति का नाम हमेशा आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार ही दर्ज करें। वर्तनी (Spelling) या श्रेणी में छोटी-सी गलती भी सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है और आवेदन लंबित या अस्वीकृत हो सकता है।
राजस्थान ST प्रमाण पत्र से मिलने वाले प्रमुख लाभ
- राजस्थान सरकार की विभिन्न भर्तियों में अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षित पदों पर आवेदन करने की पात्रता मिलती है।
- अगर भर्ती या प्रवेश प्रक्रिया केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार संचालित हो रही है, तो पात्र उम्मीदवार 7.5% ST आरक्षण का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
- राज्य के मेडिकल, इंजीनियरिंग, कृषि, पॉलिटेक्निक तथा अन्य सरकारी एवं अनुदानित शिक्षण संस्थानों में ST वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर प्रवेश का अवसर मिलता है।
- जनजातीय विद्यार्थियों के लिए संचालित प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं में आवेदन करने के लिए यह प्रमाण पत्र आवश्यक दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाता है।
- राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC), राजस्थान पुलिस सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में निर्धारित नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट और अन्य आरक्षण संबंधी सुविधाएं प्राप्त होती हैं।
- राज्य सरकार की अनुप्रति कोचिंग योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग एवं आर्थिक सहायता प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
- बारां जिले के सहरिया (PVTG) समुदाय के पात्र परिवार सामान्य ST लाभों के साथ-साथ विशेष जनजातीय विकास योजनाओं का भी लाभ उठा सकते हैं।
- वन क्षेत्रों में रहने वाले पात्र जनजातीय परिवार वन अधिकार अधिनियम, 2006 (Forest Rights Act) के अंतर्गत उपलब्ध अधिकारों और सुविधाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं।
- इसके अलावा, जनजातीय कार्य मंत्रालय तथा राजस्थान सरकार द्वारा समय-समय पर संचालित आवास, शिक्षा, स्वरोजगार, कौशल विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं में भी ST प्रमाण पत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में उपयोग किया जाता है।
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